Poems / कविताए

यहाँ सब कुछ बिक रहा है…

घोडा रेस में बिक रहा है,
वकील केस में बिक रहा है,
अदालत में जज बिक रहा है,
वर्दी में फर्ज बिक रहा है !
यहाँ सब कुछ बिक रहा है…….

मज़बूरी में इंसान बिक रहा है,
जुल्म का हैवान बिक रहा है,
पैसों कि खातिर ईमान बिक रहा है,
गरीबों का प्राण बिक रहा है !
यहाँ सब कुछ बिक रहा है…….

फिल्मों में गाना बिक रहा है,
गरीब बच्चों का दाना बिक रहा है,
स्कूल का मास्टर बिक रहा है,
अस्पताल का डाक्टर बिक रहा है !
यहाँ सब कुछ बिक रहा है…….

सड़कों पर मन बिक रहा है,
ब्यूटी पार्लरों में तन बिक रहा है,
गरीबों का गुर्दा बिक रहा है,
शर्म-हया का पर्दा बिक रहा है !
यहाँ सब कुछ बिक रहा

गेट का संत्री बिक रहा है,
पार्टी का मंत्री बिक रहा है,
खिलाडी खेल में बिक रहा है,
कानून जेल में बिक रहा है !
यहाँ सब कुछ बिक रहा है……

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