Poems / कविताए

शुभ दीपावली

अपने अंदर का स्नेह जला कर,
दीपक उजियारा करता है ।
ज्योति-किरण कितनी भी लघु हो,
पर उस से अंधियारा ड़रता है ।

आओ हर दीपक-बाती के,
मन में सोई जोत जलाएँ ।
मानवता की राह प्रकाशित,
करने वाले दीप जलाएँ ।

सूरज़ आने के पदचापों की,
आहट नहीं सुनाई देती।
पर उसके आ जाने भर से,
रजनी नहीं दिखाई देती।

कोई भी राह न रहे अँधेरी,
आओ ऐसी ज्योति जलाएँ ।
आस्था और उल्लास हृदय में,
भर आशा का सूर्य उगाएँ ।

लौ से लौ मिल जाए मन की,
सारे जग में प्रकाश भर जाए ।
अन्धकार साम्राज्य समेटे,
लौट के अपने घर को जाए ।

अमावस की नेम-प्लेट पर,
लिखें पूर्णमासी का सा उजियारा ।
प्रेम-दीप की जगमग से हम,
ज्योतिर्मय कर दें जग सारा॥

।। शुभ दीपावली ।।

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