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JNU : CURRENT ISSUE

जेएनयू  यानी जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय, किसी ना किसी कारणवश चर्चा या विवाद में इसका नाम सुनने को मिलता ही है। इस बार हॉस्टल की फीस वृद्धि और ड्रेस कोड के खिलाफ सोमवार को किये गये विरोध प्रदर्शन के लिए इसका नाम फिर से सुनने को मिला, और सोचने पर और लिखने पर मजबूर हुआ।

सबसे पहले तो ये बता दू की आखिर कितनी फीस बढ़ाई की ये लोग उन फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करनेको निकल पड़े !!!

जेएनयू प्रशासन ने पिछले १९ सालो से फीस में कोई वृद्धि नहीं की थी, एक सीटर रूम का जो पहले किराया था वो सिर्फ २० रुपये थे उनको अब ६०० रुपये किये, दो सीटर रूम का जो पहले किराया था वो सिर्फ १० रुपये थे उनको अब ३०० रुपये कुए, मेस की जो डिपोज़िट ५५०० थी उनको अब १२००० की गयी ( हालाकि  वो रेफंडेबल है )… एक बयान में, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने कहा है कि जेएनयू पर पानी, बिजली, और सेवा शुल्क के कारण प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये का शुल्क लगाया गया है, जिसे वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से प्राप्त सामान्य धनराशि से चुका रहा है। तो अब पानी और बिजली के पैसे भी स्टूडेंट को देने पड़ेंगे जो अंदाजित सालाना ५ से ६ हजार तक होगा।

अब आप ही बताओ क़्या इस फीस में किसी और यूनिवर्सिटी में हॉस्टल में रहने को मिलता है? मेरी जानकारी में तो ऐसी कोई यूनिवर्सिटी नहीं है। इतनी कम फीस है तो कौन है जो पास होना चाहेंगे भाई ? दिल्ली में इतनी प्राइम लोकेशन पर इतने काम दाम में रूम मिल रहा हो तो स्टूडेंट बन के आराम से जॉब करो और ऐश करो।

फीस ना बढ़ाये तो मैनेजमेंट क्या करें ? एक काम कर सकते है, अभी जहां  पर यूनिवर्सिटी है, उसको कहीं दूर शिफ़्ट करके ले जाए तो कम से कम ३०% लोग छोड़ के चले जायेंगे, या ये फीस को स्वीकार कर लेंगे। अभी जहा है वो जगह १०१९ एकर में फैली हुई है, उसकी किंमत कम से कम  15800 करोड़ होगी, यहाँ पे कॉमर्सियल या रेजिडेंट बनाएंगे तो उतने पैसे में कही और यूनिवर्सिटी बन सकती है और इतने काम दामों में स्टूडेंट को रहने की फेसिलिटी दे पाएंगे। पर अगर ये करेंगे तो फिरसे इन सबको प्रोटेस्ट करने का बहाना मिल जायेगा। इन सबको सिर्फ खुद का स्वार्थ देखना है, और मुफ्त में सब चाहिए।

अगर आप सब टवीटर पे आम आदमी की बात पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा की ज्यादातर लोग इस प्रोटेस्ट को गलत बता रहे है और #ShutDownJNU ट्रेंड कर रहा है। में भी इस प्रोटेस्ट को गलत मान रहा हूँ  और #ShutDownJNU को समर्थन देता हूँ।

-चेतन ठकरार

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