Asim Bakshi

क्लास रूम

क्लास रूम में क्या क्या बाते हुआ करती थी,
बेंच पैर बैठकर गुफ्तगू हुआ करती थी। 

कभी दिल को धड़काने वाली बातें,
तो कभी फ़ुज़ूल की बाते हुआ करती थी। 

कभी कभी नज़रें तिरछी हुआ करती थी,
कभी कभी आँखों में नींद रहा करती थी। 

सो जाते थे सर रखकर बेंच पर,
पर कान और आँखे खुली रहा करती थी। 

खिड़की के बहार जब नज़र जाती थी,
कटिंग की इन्तेज़ारी हुआ करती थी।  

बातें खेल कूद और पिक्चर की ज़्यादा और पढ़ाई कम हुआ करती थी। 

सुबह उठते ही कॉलेज याद आती थी,
जल्दी से पोहचने की बेताबी रहा करती थी। 

दिल में उमंग और आँखों में नूर था,
जवानी होंठो पे गीत गाया करती थी। 

रुआब तो थे बड़े बादशाओ की तरह,
जेब सिर्फ आठ आनी हुआ करती थी। 

-आसिम @ लास्ट बेंच 

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