Asim Bakshi

ना राह है ना मंज़िल है

ना राह है ना मंज़िल है,
ना कारवाँ है ना कहकशां है,
फिर भी ऐ ज़िन्दगी,
तेरे साथ चलने में अजब नशा है। 

यह मुश्किलों के दौर में,
हरेक इंसान फ़सा है,
वही कहलायेगा ज़िंदादिल,
जो ऐसे दौर में हसा है। 

चारो तरफ खामोशियाँ है,
तन्हाइयों में शहर बसा है,
सिर्फ दुवा करते रहिये,
क़ुदरतने फंदा कसा है। 

सहारे है घर के लोग,
आफत का यह असा है,
मुश्किलें भी टल जायेगी,
बरसो का यह फलसफा है !!!

-आसिम बक्षी 

कहकशा = milky way
असा = Stick
फलसफा = Philosophy

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